E waste recycling business plan

आज की इस फास्ट फॉरवर्ड दुनिया में समय और जरूरत कर अनुसार नए व्यवसाय किए जा रहे हैं। अगर आप कोई ऐसा व्यवसाय करना चाहते हैं, जिसमें लागत कम हो और मुनाफा ज्यादा, तो आपके लिए E waste recycling business बेस्ट ऑप्शन रहेगा। आजकल व्यापार में नई नई संकल्पनाएं जन्म लेती रहती हैं, सर्विस उद्योगों में भी समय के साथ बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि इनमें भी कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने की पूरी संभावना रहती है।

परन्तु यदि आप इन सब जाने पहचाने व्यवसायों से अलग कुछ हटके करना चाहते हैं जिसमें आपको खूब मुनाफा हो और पैसा भी कम लगाना पड़े तो आप ई वेस्ट रीसाइकलिंग बिजनेस शुरू कीजिए। यदि आपको नहीं पता है कि यह बिजनेस क्या है और कैसे शुरू करना है तो आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है आज हम आपको अपने इस आर्टिकल में इस बिजनेस से जुड़ी सारी जानकारी देने वाले हैं तो शुरू से एंड तक आर्टिकल को पूरा पढ़िए।

जानिए क्या होता है E-Waste ?

ई वेस्ट रीसाइकलिंग बिजनेस के बारे में बताने से पहले आपको यह जानना होगा कि ई वेस्ट यानी ई-कचरा क्या होता है?

E waste का पूरा नाम होता है Electronic wastes दरअसल यह ऐसे इलेक्ट्रॉनिक सामान होते हैं जिन्हें हम खरीद कर उनका यूज करते थे लेकिन अब खराब हो जाने के बाद या पुराने हो जाने के बाद हम उन्हें यूज नहीं कर रहे हैं । आपको बता दें कि पूरी दुनिया में करीब 50 मिलियन टन ई वेस्ट पैदा होता है। जिसे अगर  ठीक प्रकार से नष्ट या रिसायकल नहीं किया गया तो यह आगे जाकर हमारे लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन सकता है।  

आजकल की इस तकनीक की दुनिया में हम सभी बहुत एडवांस हो गए हैं और नई नई टेक्नोलॉजी का उपयोग भी करने लगे हैं। हमारा जीवन मशीनों पर निर्भर हो गया है बिना मशीनों के हम कोई कार्य नहीं करते। क्योंकि मशीनों के आने से हमारा जीवन और अधिक सरल तथा कंफरटेबल हो गया है इसलिए हम नई नई मशीनों तथा इलेक्ट्रॉनिक सामान का उपयोग करते रहते हैं और मार्केट में नई-नई महीने लांच भी होती रहती हैं। इसी वजह से दुनिया में ई वेस्ट अत्यधिक पैदा होता जा रहा है।

चूंकि ई वेस्ट बहुत जल्दी बढ़ने वाला कचरा होता है अतः यह हमारे लिए चिंता का विषय भी बन गया है। अतः ई वेस्ट रीसाइकलिंग बिजनेस द्वारा ना सिर्फ आप ई कचरे का रिसाइकल करके पैसे कमा सकते हैं बल्कि इस व्यवसाय के द्वारा आप पर्यावरण शुद्धिकरण में भी अपना सहयोग दे सकते हैं।

E waste recycling business क्या है?

अगर आप इलेक्ट्रॉनिक रीसाइक्लिंग का बिज़नेस स्टार्ट करते हैं तो आप पर्यावरण को विषाक्त मुक्त तो बनाएंगे ही लेकिन उसके साथ-साथ आप की अच्छी खासी कमाई भी हो जाएगी। ई वेस्ट रीसाइक्लिंग कंपनी आप काफी कम निवेश करके और नई प्रभावशाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ई वेस्ट में मौजूद मूल्यवान धातु, प्लास्टिक, कांच जैसे मूल्यवान और  विभिन्न  व्यापार में उपयोग होने वाले कच्चे माल को ऐसे इस्तेमाल करने के योग्य बना सकते हैं।

इन इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं से स्क्रैप निकाल कर इनको रिसाइकिलर्स को विक्रय करने पर आपको बहुत मुनाफा होगा।, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन इत्यादि ऐसे उपकरण हैं जो की रीसायकल अथवा रिफर्बिश्ड किए जाते हैं। इनकी बाज़ार में मांग भी बहुत अधिक है।

आप पुराने, बेकार इलेक्ट्रॉनिक सामानों तथा ऐसी आने वस्तुओं को सस्ते दामों में खरीदकर उनको रीसाइक्लिंग सेंटर में बेचकर पैसे कमा सकते हैं इसके आप खुद भी इन वस्तुओं को रीसायकल करने का कार्य कर सकते हैं। आप इन इलेक्ट्रॉनिक सामानों को डायरेक्ट उन कंपनियों में भी सेल कर सकते हैं जो कंपनियां मशीनरी और गैजेट्स बनाते हैं। एक और खास बात यह भी है कि आप इन ई वेस्ट मटेरियल में से कुछ ऐसा सामान भी चाट का निकाल सकते हैं जिन्हें थोड़ी बहुत मशक्कत के बाद ठीक किया जा सकता है, फिर आप इन सामानों को अच्छे दामों में बेचिए।

सबसे पहले क्या करें ?

 ई वेस्ट रीसाइकलिंग बिजनेस के लिए सर्वप्रथम आपको यह पता करना होगा कि ई कचरे के स्रोत कौन-कौन से हैं, यानी कौन सी ऐसी कंपनियां और घर है जो कंप्यूटर, मोबाइल फोन, लैपटॉप इत्यादि मशीनरी का अधिक यूज करते हैं और फिर उपयोग के बाद उन्हें बेचना चाहते हैं। के लिए पहला कदम इलेक्ट्रॉनिक कचरे के स्रोतों का पता करना है, जिसमें घर और ऐसी कंपनियां शामिल हैं जो उपकरणों का उपयोग करती हैं।

कैसे करें E waste की recycling 

ई वेस्ट रीसाइकलिंग  बिजनेस  क्या होता है इसकी जानकारी दो हमने आपको दी लेकिन यह वेस्ट रीसायकल कैसे किया जाता है इसकी नॉलेज होना भी आपको जरूरी है इसलिए हम ई वेस्ट रीसाइकलिंग प्रोसेस के दौरान किए जाने वाले सारे महत्वपूर्ण चरण आपको स्टेप बाय स्टेप बता रहे हैं जो इस प्रकार से है :

  1. Sorting process 

सबसे पहले की जाने वाली इस प्रोसेस में ई वेस्ट को रीसाइकलिंग प्लांट में लाया जाता है फिर इस वेस्ट को मैन्युअली सोर्ट किया जाता है। जिसमें बैटरी को निकाल कर अलग कर दिया जाता है लैपटॉप, HDD, मेमोरी को भी अन्य चीजों से सोर्ट करने का प्रोसेस किया जाता है। 

  1.  Disassembly

पहले मैन्युअल सोर्टिंग करने के पश्चात अगले चरण में manual dismantling का प्रोसेस होता है। इस प्रोसेस में लेबर वर्क की आवश्यकता होती है, क्योंकि यह एक गहन प्रक्रिया होती है।  इसके बाद ही वेस्ट में से  अलग-अलग सामानों को अलग-अलग  करके रख दिया जाता है। अब इस सामानों को उसमें उपस्थित मटेरियल  के हिसाब से  अलग-अलग कैटेगिरी में रख दिया जाता है। फिर आइटम में से मेटल और प्लास्टिक दोनों अलग अलग कर दिया जाता है। 

  1. First size reduction process

अब जो  काम किया जाता है उसमें  मटेरियल  के ऐसे टुकड़ों को अलग करके छोटे-छोटे टुकड़ों में किया जाता है जिन टुकड़ों को ठीक से dismantled नहीं किया जासकता है। यानि ऐसे टुकड़ों को दो दो इंच व्यास की साइज में काटा जाता है। इस प्रकार से ई वेस्ट को एक जैसे रूप में रखा जाता है।

  1. Second size reduction process

इस प्रक्रिया में हालांकि यह दो टुकड़ों को फिर से एक बार और बिल्कुल छोटे-छोटे टुकड़ों में किया जाता है। और फिर इस प्रोसेस में जो भी टेस्ट वगैरह निकलती है उसे ऐसी जगह पर निकाल दिया जाता है जहां से पर्यावरण को कोई नुकसान ना हो।

  1. Over-band Magnet

अब एक और प्रोसेस की जाती है जिसमें एक over-band magnet का उपयोग करके इन सभी छोटे छोटे टुकड़ों मैं से सारे से लौह चुंबकीय धातुओं को अन्य वेस्ट से अलग किया जाता है।

  1. Non-metallic and metallic components separation

अब  इस प्रक्रिया में सभी धातु वाली और और बिना दांत वाली वस्तुओं को अन्य सारे ई वेस्ट से अलग किया जाता है फिर यह धातु जिसे अलग किया होता है उससे कच्चे माल के लिए फैक्टरियों में बेच दिया जाता है अथवा अन्य प्रोडक्ट बनाने के लिए इनका उपयोग होता है। 

  1. Water Separation process

यह सारी प्रक्रिया का अंतिम चरण होता है ,  जिसमें  इस सारे ई वेस्ट में से प्लास्टिक को पानी की सहायता से ग्लास से अलग  कर दिया जाता है और फिर इस प्लास्टिक मटेरियल को भी इससे संबंधित फैक्टरियों में कच्चे माल की तरह बेचा जाता है अथवा नए प्रोडक्ट बनाने हेतु इनका उपयोग किया जाता है re-use या resold कर दिया जाता है।

इस प्रकार से इन सभी recycled components जैसे ग्लास (कंप्यूटर,टीवी स्क्रीन का मोबाइल इत्यादि के.), प्लास्टिक कोमा धातु आदि को सरलता पूर्वक फिर से उपयोग में लाया जा सकता है।

यह सभी ई वेस्ट मैं से जो प्लास्टिक अलग किया जाता है उन्हें रीसायकल करके दूसरा नया सामान जैसे प्लास्टिक की चप्पल, प्लास्टिक ट्रे, प्लास्टिक की कुर्सियां, खिलौने  टेबल  इत्यादि बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। ई वेस्ट में से जो धातु  अलग किया जाता है जैसे कि तांबा और स्टील  इत्यादि  उस धातु को भी रीसायकल करके उनसे भी नए मेटल प्रोडक्ट बनाए जाते हैं।

दोस्तों अब आपको समझ में आ गया होगा कि ई वेस्ट मैनेजमेंट बिजनेस क्या होता है और यह किस तरीके से काम पड़ता है। आप भी है बिजनेस कीजिए और कमाई के साथ-साथ अपने पर्यावरण विषाक्त मुक्त बनाने में हाथ बढ़ाइए।

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